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पेट के रोग में अमृत है अजवायन और अमृत धारा, चाहे कैसा भी दर्द हो ये है अचूक उपाय


★ पेट के रोग में अमृत है अजवायन और अमृत धारा, चाहे कैसा भी दर्द हो ये है अचूक उपाय ★

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  • पेट के रोग में अमृत हैं अजवायन और अमृत धारा। पेट फूलना, पेट दर्द, बदहज़मी, अजीर्ण, अरुचि, मंदाग्नि, जैसे अनेक रोगो के लिए ये रामबाण हैं। आइये जाने कैसे करे इनका सेवन।

➡ अजवायन : 

  • अजवायन का चूर्ण छ: भाग और काला नमक ( पिसा हुआ ) एक भाग लेकर मिला ले। इसमें से दो ग्राम ( आधा चम्मच ) गर्म जल से लेने से पेट के दर्द में तुरंत आराम होता है। बच्चो को आधी मात्रा में दे। इससे अफारा, वायु और पेट की गैस भी मिटती है।                            www.allayurvedic.org

➡ अजवायन की विशेषता : 

  1. साधारण जल से इसे खाने से बदहजमी, अरुचि व् मंदाग्नि मिटती है।
  2. गुनगुने पानी के साथ केवल अजवायन का चूर्ण खाने से बदहजमी, खांसी, पेट का तनाव, गुल्म (ट्यूमर), तिल्ली, कफ की खराबी, कफ और वायु की बहुत प्रकार की खराबियां दूर होती है। पेट के छोटे- बड़े केंचुए नष्ट हो जाते है। इन सब शिकायतों में आवश्यकता अनुसार सप्ताह- दो सप्ताह तक ले।
  3. अकेली अजवायन में चिरायते का कटुपोष्टिक, हींग का वायुनाशक और काली मिर्च का अग्निदीपक गुण समाया हुआ है। “एक यवानी शतमन्नपाचिका” अर्थात अकेली अजवायन सैकड़ो प्रकार के अन्न को पचाने वाली होती है। पेट दर्द, अफारा, वायुगोला, कफ, वात, शूल, वमन, कृमि, बवासीर, व् संक्रमण रोगो में यह बहुत ही लाभकारी है। www.allayurvedic.org


➡ पेट दर्द के लिए अमृत धारा भी अच्छा विकल्प हैं। आइये जाने : 

  1. अमृतधारा की दो-तीन बुँदे बताशे या खांड या पानी में डालकर लेने से पेट दर्द मिटता है। यदि एक बार में न मिटे तो आधा घंटे बाद फिर एक ऐसी खुराक लेने से आराम हो जाता है।
  2. तीन चम्मच ठंडे पानी में दो-तीन बुँदे अमृतधारा, सुबह शाम भोजन के बाद लेने से दस्त, आंव के दस्त, मरोड़, पेचिस, अतिसार, हैजा, खट्टी डकार, तेज प्यास, अधिक प्यास, पेट फूलना, पेट दर्द, खाना खाते ही उलटी या दस्त होना, मंदाग्नि, बादी, बदहजमी, आदि रोग मिटते है। वैसे तो अमृत धारा बाजार से बनी बनायी मिल जाती हैं। मगर फिर भी अगर आप घर पर बनाना चाहे तो ये बिलकुल आसान हैं। www.allayurvedic.org
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