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मौलसिरी : कटिशूल

मौलसिरी

मौलसिरी
को बकुल भी कहते है .इस वृक्ष के पत्तें चमकीले हरे और निम्बू की सी सुगंध
लिए होते है .पर सबसे सुन्दर इसके फूल होतें है जो सितारों से दिखतें है
और ज़मीन पे बिखर जाते है . इन्हें चुनने में बड़ा आनंद आता है . इनकी
खुशबु बहुत सुन्

दर होती है . ये फूल सूख कर भी खुशबु देते रहतें है . हमें हरियाली और लैंड
स्केपिंग के नाम पर कोई भी वृक्ष ना लगा के आयुर्वेदिक महत्त्व के या
सुन्दर फूल या स्वादिष्ट फल देने वाले वृक्ष ही लगाने चाहिए .आइये मौलसिरी
के महत्त्व के बारे जाने —
– इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर हिलते हुए दांत भी मज़बूत हो जाते है .
– इसकी छाल के चूर्ण से मंजन करने पर दांत वज्र की तरह मज़बूत हो जाते है .
– इसकी शाखाओं के अग्रिम कोमल भाग का काढा दूध या पानी के साथ लेने से वृद्धावस्था में भी दांत मज़बूत हो जाते है .
– इसके सूखे फूलों के महीन चूर्ण को नस्य की तरह सूंघने से सिरदर्द उसी वक़्त शांत हो जाता है .
– इसके फूलों के अर्क के ५-१० बूँद के सेवन से दिल की तेज़ और बेचैन करने
वाली धड़कन सामान्य हो जाती है और मस्तिष्क को बल मिलता है .
– इसके २० २५ ग्राम फूलों को रात भर आधा किलो पानी में भिगोकर रखें और सुबह
उसे १०-२० ग्राम की मात्रा में सुबह शाम बच्चों को पिलाने से खांसी मिट
जाती है .
– इसकी छाल के काढ़े से घावों को धोने से खराब हो चुके और गहरे घाव जल्द अच्छे हो जाते हैं .
– इसकी छाल के काढ़े का सेवन करने से गर्भाशय शुद्ध हो कर जल्द गर्भधारण होता है .
– इसकी छाल के चूर्ण के शहद के साथ सेवन करने से कटिशूल नष्ट होता है और धातु क्षीणता दूर होती है

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