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तुलसी : लिवर (यकृत),हृदय रोग,आंखों की समस्या,शीघ्र पतन एवं वीर्य की कमी

तुलसी एक दिव्य पौधा   

भारतीय संस्कृति में तुलसी के पौधे का बहुत महत्व है और इस पौधे को
बहुत पवित्र माना जाता है। ऎसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा
नहीं होता उस घर में भगवान भी रहना पसंद नहीं करते। माना जाता है कि घर के
आंगन में तुलसी का पौधा लगा कलह और दरिद्रता दूर करता है। इसे घर के आंगन
में स्थापित कर सारा परिवार सुबह-सवेरे इसकी पूजा-अर्चना करता है। यह मन और
तन दोनों को स्वच्छ करती है। इसके गुणों के कारण इसे पूजनीय मानकर उसे
देवी का दर्जा दिया जाता है। तुलसी केवल हमारी आस्था का प्रतीक भर नहीं है।
इस पौधे में पाए जाने वाले औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में भी तुलसी को
महत्वपूर्ण माना गया है। भारत में सदियों से तुलसी का इस्तेमाल होता चला आ
रहा है।

तुल्सी से उपचार
  * लिवर (यकृत) संबंधी समस्या:
तुलसी की 10-12 पत्तियों को गर्म पानी से धोकर रोज सुबह खाएं। लिवर की
समस्याओं में यह बहुत फायदेमंद है।
* पेटदर्द होना: एक चम्मच तुलसी
की पिसी हुई पत्तियों को पानी के साथ मिलाकर गाढा पेस्ट बना लें। पेटदर्द
होने पर इस लेप को नाभि और पेट के आस-पास लगाने से आराम मिलता है।
*
पाचन संबंधी समस्या :
पाचन संबंधी समस्याओं जैसे दस्त लगना, पेट में गैस
बनना आदि होने पर एक ग्लास पानी में 10-15 तुलसी की पत्तियां डालकर उबालें
और काढा बना लें। इसमें चुटकी भर सेंधा नमक डालकर पीएं।
* बुखार आने
पर :
दो कप पानी में एक चम्मच तुलसी की पत्तियों का पाउडर और एक चम्मच
इलायची पाउडर मिलाकर उबालें और काढा बना लें। दिन में दो से तीन बार यह
काढा पीएं। स्वाद के लिए चाहें तो इसमें दूध और चीनी भी मिला सकते हैं।
* खांसी-जुकाम : करीब सभी कफ सीरप को बनाने में तुलसी का इस्तेमाल किया
जाता है। तुलसी की पत्तियां कफ साफ करने में मदद करती हैं। तुलसी की कोमल
पत्तियों को थोडी- थोडी देर पर अदरक के साथ चबाने से खांसी-जुकाम से राहत
मिलती है। चाय की पत्तियों को उबालकर पीने से गले की खराश दूर हो जाती है।
इस पानी को आप गरारा करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
* सर्दी
से बचाव :
बारिश या ठंड के मौसम में सर्दी से बचाव के लिए तुलसी की लगभग
10-12 पत्तियों को एक कप दूध में उबालकर पीएं। सर्दी की दवा के साथ-साथ यह
एक न्यूट्रिटिव ड्रिंक के रूप में भी काम करता है। सर्दी जुकाम होने पर
तुलसी की पत्तियों को चाय में उबालकर पीने से राहत मिलती है। तुलसी का अर्क
तेज बुखार को कम करने में भी कारगर साबित होता है।
* श्वास की
समस्या :
श्वास संबंधी समस्याओं का उपचार करने में तुलसी खासी उपयोगी साबित
होती है। शहद, अदरक और तुलसी को मिलाकर बनाया गया काढ़ा पीने से
ब्रोंकाइटिस, दमा, कफ और सर्दी में राहत मिलती है। नमक, लौंग और तुलसी के
पत्तों से बनाया गया काढ़ा इंफ्लुएंजा (एक तरह का बुखार) में फौरन राहत
देता है।
* गुर्दे की पथरी : तुलसी गुर्दे को मजबूत बनाती है। यदि
किसी के गुर्दे में पथरी हो गई हो तो उसे शहद में मिलाकर तुलसी के अर्क का
नियमित सेवन करना चाहिए। छह महीने में फर्क दिखेगा।
* हृदय रोग : तुलसी खून में कोलेस्ट्राल के स्तर को घटाती है। ऐसे में हृदय रोगियों के लिए यह खासी कारगर साबित होती है।
* तनाव : तुलसी की पत्तियों में तनाव रोधीगुण भी पाए जाते हैं। तनाव को
खुद से दूर रखने के लिए कोई भी व्यक्ति तुलसी के 12 पत्तों का रोज दो बार
सेवन कर सकता है।
* मुंह का संक्रमण : अल्सर और मुंह के अन्य
संक्रमण में तुलसी की पत्तियां फायदेमंद साबित होती हैं। रोजाना तुलसी की
कुछ पत्तियों को चबाने से मुंह का संक्रमण दूर हो जाता है।
* त्वचा
रोग :
दाद, खुजली और त्वचा की अन्य समस्याओं में तुलसी के अर्क को प्रभावित
जगह पर लगाने से कुछ ही दिनों में रोग दूर हो जाता है। नैचुरोपैथों द्वारा
ल्यूकोडर्मा का इलाज करने में तुलसी के पत्तों को सफलता पूर्वक इस्तेमाल
किया गया है।
तुलसी की ताजा पत्तियों को संक्रमित त्वचा पर रगडे। इससे इंफेक्शन ज्यादा नहीं फैल पाता।
* सांसों की दुर्गध : तुलसी की सूखी पत्तियों को सरसों के तेल में मिलाकर
दांत साफ करने से सांसों की दुर्गध चली जाती है। पायरिया जैसी समस्या में
भी यह खासा कारगर साबित होती है।
* सिर का दर्द : सिर के दर्द में
तुलसी एक बढि़या दवा के तौर पर काम करती है। तुलसी का काढ़ा पीने से सिर के
दर्द में आराम मिलता है।
* आंखों की समस्या : आंखों की जलन में
तुलसी का अर्क बहुत कारगर साबित होता है। रात में रोजाना श्यामा तुलसी के
अर्क को दो बूंद आंखों में डालना चाहिए।
* कान में दर्द : तुलसी के पत्तों को सरसों के तेल में भून लें और लहसुन का रस मिलाकर कान में डाल लें। दर्द में आराम मिलेगा।
* ब्लड-प्रेशर को सामान्य रखने के लिए तुलसी के पत्तों का सेवन करना चाहिए।
*मासिक धर्म में अनियमियता: जिस दिन मासिक आए उस दिन से जब तक मासिक रहे
उस दिन तक तुलसी के बीज 5-5 ग्राम सुबह और शाम पानी या दूध के साथ लेने से
मासिक की समस्या ठीक होती है और जिन महिलाओ को गर्भधारण में समस्या है वो
भी ठीक होती है
*शीघ्र पतन एवं वीर्य की कमी: तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से समस्या दूर होती है
* तुलसी के पांच पत्ते और दो काली मिर्च मिलाकर खाने से वात रोग दूर हो जाता है।
* कैंसर रोग में तुलसी के पत्ते चबाकर ऊपर से पानी पीने से काफी लाभ मिलता है।
* तुलसी तथा पान के पत्तों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर देने से बच्चों के पेट फूलने का रोग समाप्त हो जाता है।
* तुलसी का तेल विटामिन सी, कैल्शियम और फास्फोरस से भरपूर होता है।
* तुलसी का तेल मक्खी- मच्छरों को भी दूर रखता है।
* बदलते मौसम में चाय बनाते हुए हमेशा तुलसी की कुछ पत्तियां डाल दें। वायरल से बचाव रहेगा।
* शहद में तुलसी की पत्तियों के रस को मिलाकर चाटने से चक्कर आना बंद हो जाता है।
* तुलसी के बीज का चूर्ण दही के साथ लेने से खूनी बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।
* तुलसी के बीजों का चूर्ण दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है और यौन-शक्ति में वृध्दि होती है।
रोज सुबह तुलसी की पत्तियों के रस को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर पीने से
स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। तुलसी की केवल पत्तियां ही लाभकारी नहीं
होती। तुलसी के पौधे पर लगने वाले फल जिन्हें अमतौर पर मंजर कहते हैं,
पत्तियों की तुलना में कहीं अघिक फायदेमंद होता है। विभिन्न रोगों में दवा
और काढे के रूप में तुलसी की पत्तियों की जगह मंजर का उपयोग भी किया जा
सकता है। इससे कफ द्वारा पैदा होने वाले रोगों से बचाने वाला और शरीर की
प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला माना गया है। किंतु जब भी तुलसी के पत्ते
मुंह में रखें, उन्हें दांतों से न चबाकर सीधे ही निगल लें। इसके पीछे का
विज्ञान यह है कि तुलसी के पत्तों में पारा धातु के अंश होते हैं। जो चबाने
पर बाहर निकलकर दांतों की सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे दंत
और मुख रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।
तुलसी का पौधा मलेरिया के कीटाणु
नष्ट
करता है। नई खोज से पता चला है इसमें कीनोल, एस्कार्बिक एसिड,
केरोटिन और एल्केलाइड होते हैं। तुलसी पत्र मिला हुआ पानी पीने से कई रोग
दूर हो जाते हैं। इसीलिए चरणामृत में तुलसी का पत्ता डाला जाता है। तुलसी
के स्पर्श से भी रोग दूर होते हैं। तुलसी पर किए गए प्रयोगों से सिद्ध हुआ
है कि रक्तचाप और पाचनतंत्र के नियमन में तथा मानसिक रोगों में यह लाभकारी
है। इससे रक्तकणों की वृद्धि होती है
‪‎हल्‬‍दी वाला दूध पीने के 7 लाभ ===================
बहुत फायदेमंद हैं हल्‍दी वाला दूध। दूध जहां कैल्शियम से भरपूर होता
है वहीं दूसरी तरफ हल्‍दी में एंटीबायोटिक होता है। दोनों ही आपके
स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। और अगर दोनों को एक साथ मिला
लिया जाये तो इनके लाभ दोगुना हो जायेगें। आइए हल्‍दी वाले दूध के ऐसे
फायदों को जानकर आप इसे पीने से खुद को रोक नहीं पायेगें ।
1.सांस संबंधी समस्‍याओं में लाभकारी ———————-
हल्दी में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते है, इसलिए इसे गर्म दूध के साथ लेने
से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम होता
है। यह मसाला आपके शरीर में गरमाहट लाता है और फेफड़े तथा साइनस में
जकड़न से तुरन्त राहत मिलती है। साथ ही यह बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों
से लड़ने में मदद करता है
2. मोटापा कम करें —————
हल्दी वाले दूध को पीने से शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी घटती है। इसमें
मौजूद कैल्शियम और मिनिरल और अन्‍य पोषक तत्व वजन घटाने में मदगार होते है।
3. हडि्डयों को मजबूत बनाये ———————–
दूध में कैल्शियम और हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी के कारण हल्दी
वाला दूध पीने से हडि्डयां मजबूत होती है और साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक
क्षमता भी बढ़ती है। हल्दी वाले दूध को पीने से हड्डियों में होने वाले
नुकसान और ऑस्टियोपोरेसिस की समस्‍या में कमी आती है ।
4. खून साफ करें ————-
आयुर्वेदिक परम्‍परा में हल्‍दी वाले दूध को एक बेहतरीन रक्त शुद्ध करने
वाला माना जाता है। यह रक्त को पतला कर रक्त वाहिकाओं की गन्दगी को साफ
करता है। और शरीर में रक्त परिसंचरण को मजबूत बनाता है।
5. पाचन संबंधी समस्‍याओं में लाभकारी ———————-
हल्‍दी वाला दूध एक शक्तिशाली एंटी-सेप्टिक होता है। यह आंतों को स्‍वस्‍थ
बनाने के साथ पेअ के अल्‍सर और कोलाइटिस के उपचार में भी मदद करता है।
इसके सेवन से पाचन बेहतर होता है और अल्‍सर, डायरिया और अपच की समस्‍या
नहीं होती है।
6. दर्द कम करें ————
हल्दी वाले दूध
के सेवन से गठिया का निदान होता हैं। साथ ही इसका रियूमेटॉइड गठिया के
कारण होने वाली सूजन के उपचार के लिये प्रयोग किया जाता है। यह जोड़ो और
मांसपेशियों को लचीला बनाता हकै जिससे दर्द कम हो जाता है
7. गहरी नींद में सहायक ——————-
हल्‍दी शरीर में ट्रीप्टोफन नामक अमीनो अम्ल को बनाता है जो शान्तिपूर्वक
और गहरी नींद में सहायक होता है। इसलिए अगर आप रात में ठीक से सो नहीं पा
रहें है या आपको बैचेनी हो रही है तो सोने से आधा घंटा पहले हल्दी वाला दूध
पीएं। इससे आपको गहरी नींद आएगी और नींद ना आने की समस्या दूर हो जाएगी।

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