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एक्ज़िमा (ECZIMA) : आयुर्वेदिक उपचार

एक्ज़िमा (ECZIMA) –

एक्ज़िमा एक प्रकार का चर्म रोग है जिसमें
रोगी की स्थिति अति कष्टपूर्ण
होती है| इस रोग की शुरुआत में
रोगी को तेज़
खुजली होती है तथा बार-बार खुजाने
पर उसके शरीर में छोटी-
छोटी फुंसियां निकल आती हैं | इन
फुंसियों में भी खुजली और जलन
होती है तथा पकने पर उनमें से मवाद
बहता रहता है और फिर यह जख्म का रूप ले लेता है |
एक्ज़िमा शरीर के
किसी भी भाग में एक गोलाकार दाने के रूप
में पैदा होता है जिसमें हर समय
खुजली होती रहती है |
मुख्य रूप से यह रोग खून
की खराबी के कारण होता है और
चिकित्सा न कराने पर तेज़ी से शरीर में
फैलता है | कब्ज़,हाज़मे
की खराबी आदि और
भी कारण से एक्ज़िमा हो सकता है | इस रोग में
सफाई रखना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह संक्रमित रोग है
 एक्ज़िमा में रोगी को खून साफ़ करने
वाली औषधियों का प्रयोग करने के साथ-साथ नहाने
के पानी में नीम
की पत्तियां या एंटीसेप्टिक लिक्विड
डालकर नहाना चाहिए| 
रोगी को खट्टी-
मीठी वस्तुओं का प्रयोग
नहीं करना चाहिए |


 एक्ज़िमा के उपचारार्थ कुछ औषधि बताएंगे –
१- नारियल के तेल में कपूर मिलाकर एक्ज़िमा वाले स्थान पर लगाने
से लाभ होता है |
२- अजवायन को पानी के साथ पीसकर
लेप बना लें | इस लेप को प्रतिदिन पीड़ायुक्त स्थान
पर लगाने से कुछ ही दिनों में एक्ज़िमा समाप्त
हो जाता है |
३- नीम के कोमल पत्तों का रस निकालकर उसमें
थोड़ी सी मिश्री मिला लें | इसे
प्रतिदिन सुबह पीने से खून
की खराबी दूर होकर
एक्ज़िमा ठीक होने लगता है |
४- हरड़ को गौमूत्र में पीसकर लेप बना लें | यह
लेप प्रतिदिन दो से तीन बार एक्जिमा पर लगाने से
लाभ होता है |
५- आश्रम द्वारा निर्मित कायाकल्प तेल के प्रयोग से
भी एक्ज़िमा में बहुत लाभ होता है | यह तेल दिन
में दो बार पीड़ायुक्त स्थान पर लगाने से आराम
मिलता है |
६- एक लीटर तिल के तेल में २५० ग्राम कनेर
की जड़ को उबालें | कुछ देर उबालने के बाद यह
जड़ जल जाती है | इसे ठण्डा करके छान लें| इस
तेल को प्रतिदिन रुई से एक्ज़िमा पर सुबह-शाम लगाने से
एक्ज़िमा जल्दी ही ठीक
हो जाता है |

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