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इमली खाने के बाद इसके बीजो को फेंकना भूल जाएँगे आप, अगर जान गये इन बीजों के 13 अद्भुत फ़ायदों के बारे में, ये लिवर से लगाकर सफ़ेद दाग़ में वरदान है


इमली (Tamarind Tree) का इस्तेमाल खाने-पीने की चीजों में खट्टापन लाने के लिए किया जाता है. सांभर, छोले, चटनी या फिर कैंडी बनाने में मुख्य रूप से इस्तेमान होने वाली इमली के स्वास्थ्य से जुड़े कई फायदे हैं। इमली शाक (सब्जी), दाल, चटनी आदि कई चीजों में डाली जाती है। इमली का स्वाद खट्टा होने के कारण यह मुंह को साफ करती है। पुरानी इमली नई इमली से अधिक गुणकारी होती है। इमली के पत्तों का सब्जी और फूलों की चटनी बनाई जाती है। दरअसल, इमली में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। साथ ही ये एंटी-आॅक्सीडेंट से भी भरपूर होती है। इसके अलावा इसमें कई उपयोगी लवण जैसे कैल्शियम, पोटैशियम, फाॅस्फोरस, मैगनीज, आयरन और फाइबर भी पाए जाते हैं। लेकिन कम ही लोगों को पता होगा कि इमली के बीजों  (Tamarind Tree seeds) का इस्तेमाल आपको ये 13 चमत्कारी फ़ायदे दे सकता है। आइए जाने इसके बारे में…
इमली के बीजों के 13 चमत्कारी फ़ायदे 

1. सफेद दाग : इमली के बीजों की मींगी और बावची दोनों को बराबर मात्रा में पीसकर लकड़ी से लगाने से सफेद दाग में लाभ होता है।2. पेट दर्द : 2 ग्राम इमली की राख को शहद में मिलाकर चाटने से लाभ मिलता है।3. बिच्छू का विष : इमली के सिंके हुए बीजों को घिसें, जब इसका सफेद भाग दिखे तो इसे डंक के स्थान पर लगा दें। यह बीज विश (जहर) चूसकर अपने आप ही हटकर गिर जाएगा।4. आँख के ऊपर होने वाली फुंसी या गुहेरी : इमली के बीजों के ऊपर का लाल छिलका हटाकर पानी के साथ घिसकर, गुहेरी पर लगाने से बहुत लाभ होता है।5. दाद : इमली के बीज को नींबू के रस के साथ पीसकर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।6. बवासीर : इमली के बीजों का भस्म बनाकर 1-2 ग्राम की मात्रा में दही के साथ मिलाकर लेने से खूनी बवासीर दूर होता है।अथवा इमली के बीज 50 ग्राम छील लें और भूनकर चूर्ण बना लें। 6 ग्राम चूर्ण दही में मिलाकर रोज खायें।

7. आवाज का बैठ जाना : इमली के 1 ग्राम पुराने फलों के चूर्ण को शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से लाभ मिलता है।8. दस्त : 3 से 6 ग्राम इमली के बीजों का चूर्ण पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से अतिसार और आमातिसार मिटता है।9. चेचक : इमली के बीज और हल्दी का चूर्ण ठण्डे पानी के साथ पीने से चेचक का रोग नहीं होता है।10. लिवर की खराबी : 20 ग्राम इमली के बीज को 250 मिलीलीटर पानी के साथ रात को भिगो दें, सुबह मसल-छानकर चीनी मिला लें, 3-4 दिन रोजाना इसे पीने से जिगर को आराम मिलता है।11. शरीर को शक्तिशाली बनाना : इमली के बीजों को लेकर इनको पानी में भिगोकर रख दें। इन बीजों को 3 दिन तक पानी में भीगने दें। 3 दिन के बाद इन छिलकों को पानी में से निकालकर इनका छिलका उतारें और इसमें इमली के बीजों के जितना ही गुड़ मिलायें। अब इन दोनों को मिलाकर लगभग 6-6 ग्राम की गोलियां बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली का सेवन करने से शरीर शक्तिशाली बन जाता है और सभी प्रकार के रोग दूर रहते हैं।12. गला बैठना : 1 ग्राम पुरानी इमली के फल का चूर्ण 4 से 6 ग्राम शहद के साथ दिन मे 2 बार लेना चाहिए।13. पेशाब का बार-बार आना : इमली के बीज सुबह 10 ग्राम की मात्रा में पानी में भिगो दें। रात में इसका छिलका उतारकर अन्दर की सफेद मींगी का सेवन करके ऊपर से गाय का दूध का पीने से बहुमूत्र (बार-बार पेशाब आना) के रोग में लाभ मिलता है।

ध्यान रहे 
कच्ची इमली भारी, गर्म और अधिक खट्टी होती है। जिन्हें इमली अनुकूल नहीं होती है, उन्हें भी पकी इमली से दान्तों का खट्टा होना, सिरदर्द और जबडे़ में दर्द, सांस की तकलीफ, खांसी और बुखार जैसे दुष्परिणाम हो सकते हैं।

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