fbpx

अस्थमा के उपचार में लिए 9 घरेलु कारगर उपाय

अस्थमा के उपचार के लिए 9 घरेलु कारगर उपाय
www.allayurvedic.org
1. सोंठ और बड़ी हरड़ को पीस कर 5 – 5 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ 3 – 3 घंटे के अंतराल पर लेते रहें। यह प्रयोग १० से १२ दिनों तक करें। आपको लाभ होगा।
2. सांस फूलने की शिकायत होने पर तुलसी के पत्‍ते काले नमक के साथ खाने से आराम मिलता है।
3. एक पके केले को दीपक की लौ में या गैस चूल्‍हे की धीमी आंच पर गर्म करें। फिर इसे छील कर उस पर पिसी हुई काली मिर्च बुरक कर रोगी को खिलाएं। इससे रोगी को आराम मिलेगा।
4. काली तुलसी के पत्‍तों को छोटी मधुमक्खियों के शहद के साथ खाने से बहुत लाभ होता है। आप 13 ग्राम शहद में 20 मि.ली. तुलसी की पत्तियों का रस निकाल कर मिलाएं और इसे चाटें। रोगी को दमा से राहत मिलेगी।
5. रात को सोने से पहले भुने चने खाकर ऊपर से गर्म दूध पी‍एं। इससे सांस की नली साफ होती है और दमा की शिकायत भी दूर हो जाती है।
www.allayurvedic.org
6. सोने से पहले 2 – 3 काली मिर्च चबाएं। तुलसी के पत्‍तों में काली मिर्च मिलाकर खाने से भी बहुत लाभ होता है।
7. आप रोज 25 – 30 ग्राम आंवले का मुरब्‍बा, 5 ग्राम पिपली का पाउडर और 5 ग्राम शहद एक साथ मिलाकर सेवन करने से भी दमे में बहुत आराम मिलता है।
8. पुरानी हल्‍दी की गांठ को पीस कर चूर्णं बना लें। फिर आधा बड़ा चम्‍मच चूर्णं 2 चम्‍मच पुराने शहद के साथ शहद में मिलाकर लेने से बहुत फाएदा होता है।
9. नींबू का रस अदरक के साथ लेने से दमा रोग में बहुत लाभ होता है।
www.allayurvedic.org
नोट : यदि बच्‍चे को अस्‍थमा है, तो उसे मूंगफली न खिलााएं।
अस्‍थमा से ग्रस्‍त बचचों को मूंगफली से एलर्जी हो सकती है। अमेरिका में ओहियो स्थित मर्सी चिल्‍ड्रंस अस्‍पताल से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता रॉबर्ट कॉन के अनुसार सांस लेते वक्‍त घरघराहट, कफ या फिर तेज सांस चलना इसके लक्षण हो सकते हैं। इस ताजा रिसर्च के मुताबिक इस बारे में लोगों को जानकारी नहीं है, क्‍योंकि इसके लक्षणों का पता ही नहीं चलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पेरेंटस को अस्‍थमा से पीडि़त बच्‍चों का मूंगफली से होने वाली एलर्जी (पीनट एलर्जी) का टेस्‍ट जरूर कराना चाहिए। पीनट एलर्जी से जुड़े सांस संबंधी दिक्‍कतों के लक्षण अस्‍थमा अटैक का कारण भी बन सकते हैं। अस्‍पताल के पीडिएट्रिक क्‍लीनिक में 1500 से अधिक बच्‍चों पर किए गए अध्‍ययन के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं। इनमें से 11% बच्‍चों को जानकारी ही नहीं थी, कि उन्‍हें मूंगफली से एलर्जी है। इसलिए आप भी मूंगफली का इस्‍तेमाल सावधानी से करें। क्‍योंकि सावधानी में ही सुरक्षा है।

Share:

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

error: Content is protected !!