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दूध में शहद मिलाकर पीने से होते हैं ये बड़े फायदे, बुढ़ापा नही झलकता साथ में पाचन शक्ति को बढ़ता है तो क़ब्ज़ को मिटाता है

शहद और दूध दोनों संपूर्ण आहार माने जाते हैं। वैसे तो दूध पीने व शहद खाने दोनों के ही कई लाभ होते हैं, लेकिन दूध और शहद दोनों को साथ लिया जाए तो इनके गुण दोगुने हो जाते हैं।शहद अपने एंटीबैक्टिरियल, एंटीआक्सीडेंट व एंटीफंगल गुणों के कारण सदियों से प्रयोग में लाया जाता रहा है।

  • शहद में प्रोटीन, एलब्यूमिन, वसा, एन्जाइम अमीनो एसिड, कार्बोहाइड्रेट्स, पराग, केसर, आयोडीन और लोहा, तांबा, मैंगनीज, पोटेशियम, सोडियम,फॉस्फोरस, कैल्शियम, क्लोरीन पाए जाते हैं। साथ ही, इसमें बहुमूल्य विटामिन – राइबोफ्लेविन, विटामिन ए, बी-1, बी-2, बी-3, बी-5, बी-6 बी-12 तथा विटामिन सी, विटामिन एच और विटामिन k भी पाए जाते हैं।

यह श्वसन संबंधी परेशानियों में भी फायदेमंद होता है। वहीं दूध में ए,बी,सी, डी, कैल्शियम, प्रोटीन व लैक्टिक एसिड आदि भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इन दोनों को साथ में लेने पर कई अनोखे स्वास्थ्य लाभ होते हैं। चलिए जानते हैं दूध और शहद को साथ लेने के ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में

दूध में शहद मिलाकर पीने के फायदे :

  1. डाइजेशन : रोजाना एक गिलास दूध में दो चम्मच शहद मिलाकर लेने से डाइजेस्टीव सिस्टम में सुधार होता है। कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है। इसे रोजाना लेने से पेट व आंत से जुड़ी समस्याएं नहीं होती हैं।
  2. एंटी एजिंग : दूध और शहद लेने न केवल स्किन ग्लो करने लगती है बल्कि शरीर को भी आराम मिलता है। प्राचीन समय से ही ग्रीक, रोमन, इजिप्ट, भारत आदि देशों में जवान दिखने के लिए एक एंटीएजिंग प्रापर्टी के रूप में दूध व शहद का सेवन किया जाता रहा है।
  3. स्किन केयर : शहद व दूध दोनों ही सुक्ष्मजीवी को खत्म करते हैं। दूध व शहद साथ लेने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है व स्किन ग्लो करने लगती है। दूध व शहद को बराबर मात्रा में मिला लें उतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर नहाने से पहले शरीर पर लगाएं स्किन निखर जाएगी।
  4. एंटी बैक्टीरियल : शहद, दूध के साथ लेने पर एंटीबैक्टीरियल प्रापर्टी की तरह काम करता है। इससे हानिकारक बैक्टिरिया शरीर पर आक्रमण नहीं कर पाते हैं व सर्दी, खांसी आदि समस्याएं दूर ही रहती हैं।
  5. अनिद्रा : दूध व शहद साथ लेना अनिद्रा रोग को दूर करने का एक प्राचीन नुस्खा है, क्योंकि दूध व शहद इन्सुलिन के स्त्रावण को नियंत्रित करता है जिससे ट्रिप्टोफेन का सही मात्रा में मस्तिष्क में स्त्रावण होता है। ट्रिप्टोफेन सिरोटोनिन में बदल जाता है सिरटोनिन, मेलेटोनिन में परिवर्तित होकर दिमाग को रिलेक्स करता है व अनिद्रा की समस्या को दूर करता है। 

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